पाठशाला

गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत शिक्षा प्रदान करना लक्ष्य-संजय श्रीवास्तव 

श्री ऋषि संस्कृति संवर्धन गुरुकुल न्यास में नवीन पुस्तकालय का लोकार्पण

उज्जैन। देश भर में वैदिक और मौखिक परम्परा के सरंक्षण के लिए वेद पाठशालाएं खोली जा रहीं हैं और गुरु शिष्य परम्परा के अंतर्गत शिक्षा प्रदान करने के लिए श्री ऋषि संस्कृति संवर्धन गुरुकुल न्यास जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निबाह रहे हैं। वेदों का अध्ययन और अध्यापन ऐसे गुरुकुल में कराकर शिष्यों को योग्य बनाया जा रहा है।
ये विचार महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के सहायक निदेशक संजय श्रीवास्तव ने श्री ऋषि संस्कृति संवर्धन गुरुकुल न्यास में नवीन पुस्तकालय के लोकार्पण के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. शिव चौरसिया ने कहा कि विद्यार्थी होना अच्छी बात है मगर अनुशासित विद्यार्थी होना और अच्छी बात है और यहाँ के विद्यार्थी प्रकृति के सुरम्य वातावरण में वैदिक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विशेष अतिथि तहसीलदार रूपाली जैन, प्राध्यापक शैलेन्द्र भारल ने भी प्रेरक उद्भोधन दिए। परमाचार्य प्रो. देवकरण शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि यह गुरुकुल, महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के निर्देशन में कार्य कर रहा है। अतिथियों ने दीप आलोकन कर आयोजन का शुभारम्भ किया। गुरुकुल में अतिथियों ने नवीन आरो वाटर कूलर का भी शुभारम्भ किया। अतिथि स्वागत प्रबंधक सुरेश शर्मा, दीपक पाठक, सतीश शर्मा, शैलेश लेले, डॉ, हरीशकुमार सिंह आदि ने किया। संचालन डॉ. धर्मपाल शर्मा ने और आभार सुभाष पाठक ने व्यक्त किया।

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